बच्चों में सुनने की कमज़ोरी अक्सर महीनों तक पहचान में नहीं आती। जितनी जल्दी इसे पकड़ा जाए, उतना ही बच्चे की बोलने और सीखने की क्षमता पर असर कम होता है। इस लेख में जानें किन संकेतों पर ध्यान देना चाहिए।
सुनने की कमज़ोरी बच्चे को कैसे प्रभावित करती है?
जीवन के पहले 3 साल बच्चे के दिमाग में भाषा और बोलने की क्षमता बनने का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है। अगर इस दौरान सुनने में कोई समस्या हो तो बच्चा:
- देर से बोलना शुरू करता है
- शब्दों को साफ नहीं बोल पाता
- स्कूल में पढ़ाई में पीछे रह जाता है
- दोस्तों के साथ बातचीत में कठिनाई महसूस करता है
समय पर इलाज से बच्चा अपने साथियों के साथ सामान्य विकास कर सकता है।
उम्र के अनुसार संकेत
नवजात से 6 महीने तक
- तेज़ आवाज़ से चौंकता नहीं
- माँ की आवाज़ सुनकर शांत नहीं होता
- 3-4 महीने में आवाज़ की दिशा में सिर नहीं घुमाता
- 4-5 महीने में "आ", "गू" जैसी आवाज़ें नहीं निकालता
6 से 12 महीने
- नाम पुकारने पर प्रतिक्रिया नहीं देता
- "मा", "बा", "दा" जैसी आवाज़ें नहीं बोलता
- दरवाज़ा बंद होने या फोन बजने पर ध्यान नहीं देता
- 12 महीने तक हाथ हिलाना (bye-bye) या इशारा नहीं करता
1 से 3 साल
- 16 महीने तक कोई शब्द नहीं बोलता
- 24 महीने तक दो शब्द मिलाकर नहीं बोलता (जैसे "पानी दो")
- टीवी बहुत तेज़ आवाज़ में देखता है
- बार-बार "क्या?" या "फिर से बोलो" कहता है
- बोलना समझना मुश्किल होता है
स्कूल जाने की उम्र (4+ साल)
- क्लास में ध्यान नहीं देता — जिसे अक्सर आलस्य समझ लिया जाता है
- पढ़ाई में पीछे रहता है
- बार-बार बातें दोहराने को कहता है
- बोलने में गलतियाँ करता है
⚠ ज़रूरी बात
अगर बच्चा कुछ आवाज़ों पर प्रतिक्रिया देता है लेकिन अन्य पर नहीं — तो भी सुनने की जांच ज़रूरी है। हल्की सुनने की कमज़ोरी घर पर आसानी से पकड़ में नहीं आती। केवल ऑडियोमेट्री जांच ही सच्चाई बताती है।
बिजनौर में बच्चे की सुनने की जांच कैसे होती है?
MMM हियरिंग सेंटर में Dr. Shehroz Majid बच्चे की पूरी ऑडियोलॉजिकल जांच करते हैं:
- OAE स्क्रीनिंग — नवजात और छोटे बच्चों के लिए, बिना किसी दर्द के
- बिहेवियरल ऑडियोमेट्री — 6 महीने से 3 साल तक के बच्चों के लिए
- प्ले ऑडियोमेट्री — 3-5 साल के बच्चों के लिए खेल के ज़रिए जांच
- प्योर-टोन ऑडियोमेट्री — 5 साल और बड़े बच्चों के लिए
- टाइम्पेनोमेट्री — कान के पर्दे और मध्य कान की जांच
पूरी जांच 30–60 मिनट में होती है और बिल्कुल दर्दरहित होती है।
📌 जल्दी करें — पहले 5 साल सबसे महत्वपूर्ण हैं
जितनी जल्दी सुनने की कमज़ोरी पकड़ी जाए और इलाज शुरू हो, उतना ही बेहतर परिणाम मिलता है। कई बच्चे जो 6 महीने की उम्र में सुनने की मशीन लगवाते हैं, वे बड़े होकर सामान्य बच्चों की तरह बोलते और सीखते हैं।
बच्चे की सुनने की जांच करवाएं — बिजनौर में
अगर आपको ज़रा भी शक हो तो देर न करें। Dr. Shehroz Majid से मिलें।