बच्चों की सुनने की समस्या

बच्चों में सुनने की कमज़ोरी के संकेत — माता-पिता के लिए ज़रूरी जानकारी

📅 12 जुलाई 2026 📋 Dr. Shehroz Majid ⌛ 6 मिनट पढ़ें

बच्चों में सुनने की कमज़ोरी अक्सर महीनों तक पहचान में नहीं आती। जितनी जल्दी इसे पकड़ा जाए, उतना ही बच्चे की बोलने और सीखने की क्षमता पर असर कम होता है। इस लेख में जानें किन संकेतों पर ध्यान देना चाहिए।

सुनने की कमज़ोरी बच्चे को कैसे प्रभावित करती है?

जीवन के पहले 3 साल बच्चे के दिमाग में भाषा और बोलने की क्षमता बनने का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है। अगर इस दौरान सुनने में कोई समस्या हो तो बच्चा:

समय पर इलाज से बच्चा अपने साथियों के साथ सामान्य विकास कर सकता है।

उम्र के अनुसार संकेत

नवजात से 6 महीने तक

6 से 12 महीने

1 से 3 साल

स्कूल जाने की उम्र (4+ साल)

⚠ ज़रूरी बात

अगर बच्चा कुछ आवाज़ों पर प्रतिक्रिया देता है लेकिन अन्य पर नहीं — तो भी सुनने की जांच ज़रूरी है। हल्की सुनने की कमज़ोरी घर पर आसानी से पकड़ में नहीं आती। केवल ऑडियोमेट्री जांच ही सच्चाई बताती है।

बिजनौर में बच्चे की सुनने की जांच कैसे होती है?

MMM हियरिंग सेंटर में Dr. Shehroz Majid बच्चे की पूरी ऑडियोलॉजिकल जांच करते हैं:

पूरी जांच 30–60 मिनट में होती है और बिल्कुल दर्दरहित होती है।

📌 जल्दी करें — पहले 5 साल सबसे महत्वपूर्ण हैं

जितनी जल्दी सुनने की कमज़ोरी पकड़ी जाए और इलाज शुरू हो, उतना ही बेहतर परिणाम मिलता है। कई बच्चे जो 6 महीने की उम्र में सुनने की मशीन लगवाते हैं, वे बड़े होकर सामान्य बच्चों की तरह बोलते और सीखते हैं।

बच्चे की सुनने की जांच करवाएं — बिजनौर में

अगर आपको ज़रा भी शक हो तो देर न करें। Dr. Shehroz Majid से मिलें।

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Dr. Shehroz Majid ऑडियोलॉजिस्ट एंड स्पीच-लैंग्वेज पैथोलॉजिस्ट | MASLP, B.ASLP MMM स्पीच थेरेपी एंड हियरिंग सेंटर, बिजनौर, UP